प्रस्तावना (Introduction)
पृथ्वी पर जीवन अत्यंत विविध और जटिल रूपों में विद्यमान है। सूक्ष्म जीवों से लेकर विशाल वृक्षों और जटिल जीव-जंतुओं तक, जीवन के अनगिनत रूप इस ग्रह को जीवंत बनाते हैं। इस समस्त विविधता को ही जैव विविधता कहा जाता है। जैव विविधता केवल जीवों की संख्या का ही वर्णन नहीं करती, बल्कि उनके आपसी संबंधों, उनके रहने के स्थानों तथा उनके विकास की प्रक्रियाओं को भी सम्मिलित करती है। यह प्रकृति का मूल आधार है, जो मानव जीवन के लिए आवश्यक संसाधनों—जैसे भोजन, जल, औषधि और स्वच्छ वातावरण—की उपलब्धता सुनिश्चित करता है। इस प्रकार जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन की निरंतरता और संतुलन के लिए अनिवार्य है।
जैव विविधता की अवधारणा (Concept of Biodiversity)
“जैव विविधता” शब्द जीवन की विविधता को व्यक्त करता है, जो विभिन्न स्तरों पर विद्यमान होती है। यह अवधारणा इस तथ्य पर आधारित है कि पृथ्वी पर जीवन एक समान नहीं है, बल्कि विभिन्न रूपों, आकारों, संरचनाओं और कार्यों में विभाजित है। जैव विविधता में न केवल विभिन्न प्रकार के जीव शामिल होते हैं, बल्कि उनके भीतर मौजूद आनुवंशिक भिन्नताएँ और वे पारिस्थितिक तंत्र भी सम्मिलित होते हैं जिनमें वे रहते हैं। इस प्रकार, जैव विविधता एक समग्र अवधारणा है, जो जीवन के सभी रूपों और उनके पारस्परिक संबंधों को एकीकृत रूप में प्रस्तुत करती है।
जैव विविधता की परिभाषाएँ (Definitions of Biodiversity)
जैव विविधता को विभिन्न वैज्ञानिकों और संस्थाओं ने अपने-अपने दृष्टिकोण से परिभाषित किया है, जिससे इस अवधारणा की व्यापकता स्पष्ट होती है।
Convention on Biological Diversity (1992) के अनुसार, जैव विविधता सभी जीवों के बीच पाई जाने वाली विविधता है, जिसमें स्थलीय, समुद्री और अन्य जलीय पारिस्थितिक तंत्र शामिल हैं, तथा इसमें प्रजातियों के भीतर, प्रजातियों के बीच और पारिस्थितिक तंत्रों की विविधता भी सम्मिलित होती है। यह परिभाषा जैव विविधता को एक व्यापक और बहुस्तरीय अवधारणा के रूप में प्रस्तुत करती है।
World Resource Institute के अनुसार, जैव विविधता विश्व के सभी जीवों की विविधता, उनके आनुवंशिक भिन्नताओं और उनके द्वारा निर्मित पारिस्थितिक तंत्रों का समुच्चय है। यह परिभाषा विशेष रूप से इस बात पर बल देती है कि जैव विविधता केवल जीवों तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके जीन और उनके पर्यावरण को भी सम्मिलित करती है।
ई. ओ. विल्सन के अनुसार, जैव विविधता पृथ्वी पर उपस्थित सभी जीवित तत्वों का प्रतिनिधित्व करती है। यह परिभाषा इस बात को रेखांकित करती है कि जैव विविधता जीवन की सम्पूर्णता का प्रतीक है।
इन सभी परिभाषाओं से स्पष्ट होता है कि जैव विविधता एक बहुआयामी और जटिल अवधारणा है, जिसमें जीवन के विभिन्न स्तरों की विविधता सम्मिलित होती है।
जैव विविधता के स्तर (Levels of Biodiversity)

जैव विविधता का वैश्विक वितरण (Global Distribution of Biodiversity)
जैव विविधता का वैश्विक वितरण पृथ्वी पर समान रूप से नहीं पाया जाता, बल्कि यह विभिन्न भौगोलिक, जलवायु तथा पारिस्थितिक कारकों के अनुसार भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में अलग-अलग स्तर पर वितरित होता है। सामान्यतः जैव विविधता का वितरण अक्षांश (Latitude), ऊँचाई (Altitude), जलवायु (Climate) और स्थलाकृतिक विशेषताओं (Topography) से प्रभावित होता है।
1. अक्षांशीय प्रवृत्ति (Latitudinal Gradient)
जैव विविधता का सबसे प्रमुख पैटर्न यह है कि यह भूमध्य रेखा (Equator) के पास अधिकतम और ध्रुवीय क्षेत्रों की ओर घटती जाती है।
उष्णकटिबंधीय क्षेत्र (Tropical Regions), जैसे—अमेज़न वर्षावन, कांगो बेसिन और दक्षिण-पूर्व एशिया, जैव विविधता के हॉटस्पॉट माने जाते हैं।
इसके विपरीत, ध्रुवीय क्षेत्रों में अत्यधिक ठंड और कठिन परिस्थितियों के कारण प्रजातियों की संख्या कम होती है।
2. ऊँचाई के अनुसार वितरण (Altitudinal Gradient)
जैसे-जैसे ऊँचाई बढ़ती है, तापमान और ऑक्सीजन की मात्रा कम होती जाती है, जिससे जैव विविधता में भी कमी आती है।
पहाड़ी क्षेत्रों के निचले भागों में अधिक विविधता पाई जाती है, जबकि ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में सीमित प्रजातियाँ ही जीवित रह पाती हैं।
3. जलवायु का प्रभाव (Climatic Influence)
जलवायु—विशेष रूप से तापमान और वर्षा—जैव विविधता के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जहाँ वर्षा और तापमान संतुलित होते हैं, वहाँ जैव विविधता अधिक होती है।
उदाहरण के लिए, उष्णकटिबंधीय वर्षावनों में अधिक वर्षा और गर्म जलवायु के कारण प्रजातियों की विविधता अत्यधिक होती है।
4. स्थलीय और जलीय वितरण (Terrestrial and Aquatic Distribution)
जैव विविधता केवल स्थल (land) तक सीमित नहीं है, बल्कि यह जल में भी व्यापक रूप से पाई जाती है—जैसे समुद्र, नदियाँ और झीलें।
समुद्री पारिस्थितिक तंत्र, विशेषकर प्रवाल भित्तियाँ (Coral Reefs), अत्यधिक जैव विविधता वाले क्षेत्र हैं।
स्थलीय पारिस्थितिक तंत्रों में वन, घासभूमि और मरुस्थल प्रमुख हैं, जिनमें विविधता का स्तर अलग-अलग होता है।
5. जैव विविधता हॉटस्पॉट (Biodiversity Hotspots)
दुनिया में कुछ विशेष क्षेत्र ऐसे हैं जहाँ अत्यधिक जैव विविधता पाई जाती है, लेकिन वे गंभीर खतरे में भी हैं—इन्हें हॉटस्पॉट कहा जाता है।
भारत में पश्चिमी घाट (Western Ghats) और पूर्वोत्तर क्षेत्र (North-East India) प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट हैं।
उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जैव विविधता की अधिकता के कारण
उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जैव विविधता अधिक होने के पीछे कई वैज्ञानिक कारण हैं। इन क्षेत्रों में जलवायु अपेक्षाकृत स्थिर रहती है, जिससे प्रजातियों को लंबे समय तक विकसित होने का अवसर मिलता है। उच्च तापमान और आर्द्रता जीवों के विकास और प्रजनन के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं।
इसके अतिरिक्त, इन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा की अधिक उपलब्धता होती है, जिससे प्रकाश संश्लेषण की दर अधिक होती है और खाद्य श्रृंखला अधिक विकसित होती है। प्रजातियों के बीच प्रतिस्पर्धा और परस्पर क्रियाएँ भी अधिक होती हैं, जो विविधता को बनाए रखने में सहायक होती हैं। इन सभी कारणों के संयुक्त प्रभाव से उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में जैव विविधता अत्यधिक समृद्ध होती है।
जैव विविधता का महत्व (Importance of Biodiversity)
जैव विविधता (Biodiversity) पृथ्वी पर जीवन की विविधता और उसकी जटिलता को दर्शाती है। यह केवल पर्यावरण की सुंदरता तक सीमित नहीं है, बल्कि मानव जीवन, अर्थव्यवस्था और पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत आवश्यक है। जैव विविधता का महत्व विभिन्न स्तरों पर समझा जा सकता है:
1. पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना (Ecological Balance)
जैव विविधता विभिन्न जीवों के बीच संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। खाद्य श्रृंखला (Food Chain) और खाद्य जाल (Food Web) के माध्यम से ऊर्जा का प्रवाह संतुलित रहता है, जिससे पारिस्थितिक तंत्र स्थिर बना रहता है।
2. आर्थिक महत्व (Economic Importance)
कृषि, मत्स्य पालन, वानिकी और औद्योगिक क्षेत्रों में जैव विविधता का महत्वपूर्ण योगदान है। हमें भोजन, लकड़ी, रेशा (fiber) और अन्य कच्चे पदार्थ जैव विविधता से ही प्राप्त होते हैं।
उदाहरण: धान, गेहूँ, फल, सब्जियाँ आदि।
3. औषधीय महत्व (Medicinal Importance)
अनेक औषधियाँ पौधों और जीवों से प्राप्त होती हैं। आयुर्वेद, यूनानी और आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों में जैव विविधता का व्यापक उपयोग होता है।
कई महत्वपूर्ण दवाइयाँ वनस्पतियों से ही विकसित की गई हैं।
4. पारिस्थितिक सेवाएँ (Ecosystem Services)
जैव विविधता हमें कई प्राकृतिक सेवाएँ प्रदान करती है, जैसे—
- परागण (Pollination)
- जल शुद्धिकरण
- मृदा संरक्षण
- जलवायु नियंत्रण
ये सेवाएँ जीवन के लिए अत्यंत आवश्यक हैं।
5. आनुवंशिक संसाधन (Genetic Resources)
जैव विविधता विभिन्न जीनों का भंडार है, जो नई फसलों के विकास, रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और वैज्ञानिक अनुसंधान में सहायक होता है।
6. सांस्कृतिक और सौंदर्यात्मक महत्व (Cultural & Aesthetic Value)
जैव विविधता हमारी संस्कृति, परंपराओं और पर्यटन से भी जुड़ी हुई है। प्राकृतिक सौंदर्य मानसिक शांति और प्रेरणा प्रदान करता है।
जैव विविधता का ह्रास (Loss of Biodiversity)
जैव विविधता का ह्रास (Loss of Biodiversity) पृथ्वी पर पाए जाने वाले जीव-जंतुओं, पौधों और सूक्ष्मजीवों की विविधता में कमी को दर्शाता है। यह ह्रास वर्तमान समय की सबसे गंभीर पर्यावरणीय समस्याओं में से एक है, जो प्राकृतिक संतुलन को प्रभावित करने के साथ-साथ मानव जीवन के लिए भी खतरा उत्पन्न करता है। जैव विविधता में कमी प्राकृतिक कारणों के साथ-साथ मानव गतिविधियों के कारण तेज़ी से बढ़ रही है।
जैव विविधता के ह्रास के प्रमुख कारण (Causes of Biodiversity Loss)
1. आवास विनाश (Habitat Destruction):
वनों की कटाई, शहरीकरण, औद्योगिकीकरण और कृषि विस्तार के कारण प्राकृतिक आवास नष्ट हो रहे हैं, जिससे अनेक प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर पहुँच रही हैं।
2. जलवायु परिवर्तन (Climate Change):
तापमान में वृद्धि, वर्षा के पैटर्न में बदलाव और ग्लोबल वार्मिंग के कारण कई जीव अपने प्राकृतिक आवास में जीवित नहीं रह पाते।
3. प्रदूषण (Pollution):
वायु, जल और मृदा प्रदूषण जीवों के स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं, जिससे उनकी संख्या में कमी आती है।
4. अति-शोषण (Overexploitation):
मानव द्वारा संसाधनों का अत्यधिक उपयोग—जैसे शिकार, मछली पकड़ना और वनों का अत्यधिक दोहन—प्रजातियों के अस्तित्व के लिए खतरा बन जाता है।
5. बाहरी प्रजातियों का प्रवेश (Invasive Species):
विदेशी प्रजातियाँ स्थानीय प्रजातियों के साथ प्रतिस्पर्धा कर उन्हें नष्ट कर देती हैं।
जैव विविधता के ह्रास के प्रभाव (Impacts)
- पारिस्थितिक संतुलन में गड़बड़ी
- खाद्य श्रृंखला (Food Chain) का टूटना
- प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता में वृद्धि
- औषधीय संसाधनों की कमी
- मानव जीवन और अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव
भारत एक महा-जैव विविधता राष्ट्र (India as a Mega Diversity Nation)
भारत विश्व के उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिन्हें महा-जैव विविधता राष्ट्र कहा जाता है, क्योंकि यहाँ पृथ्वी की अत्यधिक जैव विविधता पाई जाती है। भारत में हिमालय पर्वत, गंगा के मैदान, दक्कन का पठार, थार मरुस्थल, तटीय क्षेत्र तथा द्वीप समूह जैसे विविध भौगोलिक स्वरूप मौजूद हैं, जो अनेक प्रकार के आवास प्रदान करते हैं। इसके साथ ही यहाँ उष्णकटिबंधीय, उपोष्णकटिबंधीय और समशीतोष्ण जलवायु पाई जाती है, जिससे विभिन्न प्रकार के पौधे और जीव-जंतु विकसित होते हैं। भारत में विश्व की लगभग 8% ज्ञात प्रजातियाँ पाई जाती हैं, जो इसकी जैविक समृद्धि को दर्शाती हैं। इसके अतिरिक्त, भारत में चार प्रमुख जैव विविधता हॉटस्पॉट—पश्चिमी घाट, पूर्वोत्तर हिमालय, इंडो-बर्मा क्षेत्र और सुंडालैंड (निकोबार द्वीप)—स्थित हैं, जहाँ अत्यधिक और विशिष्ट (स्थानिक) प्रजातियाँ पाई जाती हैं। भारत की सांस्कृतिक परंपराएँ और प्राचीन ज्ञान, जैसे आयुर्वेद और प्रकृति पूजा, भी जैव विविधता के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत की सामान्य वनस्पतियाँ (Introduction to Common Plants in India)
भारत अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए प्रसिद्ध है। यहाँ विभिन्न जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियों के कारण अनेक प्रकार के पौधे पाए जाते हैं, जैसे वृक्ष, झाड़ियाँ, जड़ी-बूटियाँ, फसलें और औषधीय पौधे। ये सभी पौधे पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने, ऑक्सीजन प्रदान करने, भोजन उपलब्ध कराने तथा जीव-जंतुओं को आश्रय देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
| Plant Name (पौधा) | Scientific Name (वैज्ञानिक नाम) | Type (प्रकार) | Importance (महत्व) |
|---|---|---|---|
| Neem (नीम) | Azadirachta indica | Tree (वृक्ष) | औषधीय, कीट नियंत्रण |
| Tulsi (तुलसी) | Ocimum tenuiflorum | Herb (जड़ी-बूटी) | औषधीय, वायु शुद्धिकरण |
| Mango (आम) | Mangifera indica | Tree (वृक्ष) | फल, जीवों के लिए भोजन |
| Banyan (बरगद) | Ficus benghalensis | Tree (वृक्ष) | आश्रय, पारिस्थितिक संतुलन |
| Peepal (पीपल) | Ficus religiosa | Tree (वृक्ष) | ऑक्सीजन, धार्मिक महत्व |
| Coconut (नारियल) | Cocos nucifera | Tree (वृक्ष) | भोजन, तेल, तटीय अर्थव्यवस्था |
| Tamarind (इमली) | Tamarindus indica | Tree (वृक्ष) | खट्टा फल, औषधीय उपयोग |
| Rice (धान) | Oryza sativa | Crop (फसल) | मुख्य खाद्य स्रोत |
| Wheat (गेहूँ) | Triticum aestivum | Crop (फसल) | खाद्य सुरक्षा |
| Bamboo (बांस) | Bambusa spp. | Grass | पारिस्थितिक व आर्थिक महत्व |
| Aloe Vera (एलोवेरा) | Aloe barbadensis | Herb | औषधीय, त्वचा देखभाल |
| Ashwagandha (अश्वगंधा) | Withania somnifera | Herb | आयुर्वेदिक औषधि |
| Turmeric (हल्दी) | Curcuma longa | Herb | एंटीसेप्टिक, औषधीय |
| Ginger (अदरक) | Zingiber officinale | Herb | पाचन में सहायक |
| Amla (आँवला) | Phyllanthus emblica | Tree | विटामिन C, औषधीय |
| Giloy (गिलोय) | Tinospora cordifolia | Climber | रोग प्रतिरोधक |
| Brahmi (ब्राह्मी) | Bacopa monnieri | Herb | स्मरण शक्ति |
| Mint (पुदीना) | Mentha | Herb | पाचन, ठंडक प्रदान करता है |
| Tea (चाय) | Camellia sinensis | Shrub | पेय, आर्थिक महत्व |
Our Common Animals (हमारे सामान्य जीव-जंतु)
भारत की समृद्ध जैव विविधता में विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु शामिल हैं, जिन्हें मुख्यतः कशेरुकी (Vertebrates) और अकशेरुकी (Invertebrates) समूहों में वर्गीकृत किया जाता है। ये सभी जीव पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नीचे प्रमुख पशु समूहों का प्रतिशत और भारत की वैश्विक रैंकिंग दी गई है:
भारत की समृद्ध जैव विविधता में विभिन्न प्रकार के जीव-जंतु शामिल हैं, जिन्हें मुख्यतः कशेरुकी (Vertebrates) और अकशेरुकी (Invertebrates) समूहों में वर्गीकृत किया जाता है। ये सभी जीव पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नीचे प्रमुख पशु समूहों का प्रतिशत और भारत की वैश्विक रैंकिंग दी गई है:
Animal Group (समूह) Percentage (%) (लगभग) India’s Global Rank (रैंक) Examples (उदाहरण) Invertebrates (अकशेरुकी) ~90–95% शीर्ष देशों में कीट, केंचुआ, मोलस्क Mammals (स्तनधारी) ~0.4% लगभग 10वाँ बाघ, हाथी, गाय Birds (पक्षी) ~0.7% लगभग 8वाँ मोर, कबूतर, कौआ Reptiles (सरीसृप) ~0.3% लगभग 5वाँ साँप, छिपकली Amphibians (उभयचर) ~0.2% लगभग 7वाँ मेंढक, टोड Fishes (मछलियाँ) ~3% लगभग 9वाँ रोहू, शार्क
Wildlife in Trade (वन्यजीव व्यापार)
| Animal Group (समूह) | Percentage (%) (लगभग) | India’s Global Rank (रैंक) | Examples (उदाहरण) |
|---|---|---|---|
| Invertebrates (अकशेरुकी) | ~90–95% | शीर्ष देशों में | कीट, केंचुआ, मोलस्क |
| Mammals (स्तनधारी) | ~0.4% | लगभग 10वाँ | बाघ, हाथी, गाय |
| Birds (पक्षी) | ~0.7% | लगभग 8वाँ | मोर, कबूतर, कौआ |
| Reptiles (सरीसृप) | ~0.3% | लगभग 5वाँ | साँप, छिपकली |
| Amphibians (उभयचर) | ~0.2% | लगभग 7वाँ | मेंढक, टोड |
| Fishes (मछलियाँ) | ~3% | लगभग 9वाँ | रोहू, शार्क |
वन्यजीव व्यापार (Wildlife Trade) का अर्थ है जंगली पशु-पक्षियों, पौधों तथा उनके अंगों (जैसे खाल, दाँत, सींग, हड्डियाँ आदि) का क्रय-विक्रय। यह व्यापार कानूनी (Legal) और अवैध (Illegal) दोनों रूपों में होता है, लेकिन अवैध वन्यजीव व्यापार आज विश्व की सबसे बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं में से एक बन चुका है।\
वन्यजीव व्यापार के प्रमुख कारण
वन्यजीव व्यापार (Wildlife Trade) का अर्थ है जंगली पशु-पक्षियों, पौधों तथा उनके अंगों (जैसे खाल, दाँत, सींग, हड्डियाँ आदि) का क्रय-विक्रय। यह व्यापार कानूनी (Legal) और अवैध (Illegal) दोनों रूपों में होता है, लेकिन अवैध वन्यजीव व्यापार आज विश्व की सबसे बड़ी पर्यावरणीय समस्याओं में से एक बन चुका है।\
वन्यजीव व्यापार के प्रमुख कारण
- आर्थिक लाभ (Profit Motive): दुर्लभ प्रजातियों के अंगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत मिलती है।
- औषधीय उपयोग: पारंपरिक चिकित्सा में कई पशु अंगों का उपयोग किया जाता है।
- फैशन और सजावट: खाल, दाँत, पंख आदि का उपयोग कपड़े, आभूषण और सजावटी वस्तुओं में किया जाता है।
- पालतू व्यापार (Pet Trade): विदेशी पक्षियों और जानवरों को पालतू के रूप में बेचा जाता है।
- आर्थिक लाभ (Profit Motive): दुर्लभ प्रजातियों के अंगों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारी कीमत मिलती है।
- औषधीय उपयोग: पारंपरिक चिकित्सा में कई पशु अंगों का उपयोग किया जाता है।
- फैशन और सजावट: खाल, दाँत, पंख आदि का उपयोग कपड़े, आभूषण और सजावटी वस्तुओं में किया जाता है।
- पालतू व्यापार (Pet Trade): विदेशी पक्षियों और जानवरों को पालतू के रूप में बेचा जाता है।
वन्यजीव व्यापार के प्रभाव
- कई प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर पहुँच जाती हैं।
- पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाता है।
- खाद्य श्रृंखला (Food Chain) प्रभावित होती है।
- जैव विविधता में कमी आती है।
- कई प्रजातियाँ विलुप्ति के कगार पर पहुँच जाती हैं।
- पारिस्थितिक संतुलन बिगड़ जाता है।
- खाद्य श्रृंखला (Food Chain) प्रभावित होती है।
- जैव विविधता में कमी आती है।
जैव विविधता का संरक्षण (Conservation of Biodiversity)
जैव विविधता के संरक्षण के लिए विभिन्न रणनीतियाँ अपनाई जाती हैं, जिनका उद्देश्य प्राकृतिक संसाधनों का सतत उपयोग और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है। इन रणनीतियों को मुख्यतः इन-सीटू (In-situ) और एक्स-सीटू (Ex-situ) संरक्षण में वर्गीकृत किया जाता है।
1. इन-सीटू संरक्षण (In-situ Conservation)
इसमें जीवों को उनके प्राकृतिक आवास (Natural Habitat) में ही संरक्षित किया जाता है। यह सबसे प्रभावी और दीर्घकालिक संरक्षण विधि है।
उदाहरण:
- राष्ट्रीय उद्यान (National Parks)
- वन्यजीव अभयारण्य (Wildlife Sanctuaries)
- बायोस्फीयर रिजर्व (Biosphere Reserves)
महत्व:
- प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र सुरक्षित रहता है
- प्रजातियाँ अपने प्राकृतिक परिवेश में विकसित होती हैं
2. एक्स-सीटू संरक्षण (Ex-situ Conservation)
इसमें जीवों को उनके प्राकृतिक आवास से बाहर नियंत्रित परिस्थितियों में संरक्षित किया जाता है।
उदाहरण:
- चिड़ियाघर (Zoos)
- वनस्पति उद्यान (Botanical Gardens)
- जीन बैंक (Gene Banks)
- बीज बैंक (Seed Banks)
महत्व:
- संकटग्रस्त प्रजातियों को विलुप्त होने से बचाया जाता है
- अनुसंधान और प्रजनन में सहायता मिलती है
3. विधिक और नीतिगत उपाय (Legal Measures)
- वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972
- पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986
- अंतरराष्ट्रीय समझौते जैसे CITES
ये कानून अवैध शिकार और व्यापार को रोकने में सहायक हैं।
